नई दिल्ली/गुवाहाटी: केंद्र सरकार ने 2 नवंबर को गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से अगरवुड चिप्स और अगरवुड तेल के निर्यात को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय असम के अगरवुड उत्पादकों और निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो लंबे समय से इस वस्तु के वैध निर्यात की मांग कर रहे थे। सरकार के इस कदम से राज्य में अगरवुड आधारित उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
अगरवुड, जिसे 'इगलवुड' या 'अगर' भी कहा जाता है, असम की पारंपरिक और उच्च मूल्य वाली वन संपदा है। इसका उपयोग इत्र, धूप, औषधि और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है। अब तक इसके निर्यात में कई प्रशासनिक और तकनीकी बाधाएं थीं, जिससे उत्पादकों को उचित बाजार मूल्य नहीं मिल पाता था। हवाई अड्डे से सीधे निर्यात की अनुमति मिलने से परिवहन लागत कम होगी और डिलीवरी समय में तेजी आएगी।
केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत असम सरकार और स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे राज्य के आर्थिक विकास के लिए 'गेम चेंजर' बताया है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों और उत्पादकों की आय में भी इजाफा होगा। अगरवुड उत्पादकों का कहना है कि यह निर्णय उनके लिए दशकों पुरानी मांग का समाधान है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगरवुड चिप्स और तेल का वैश्विक बाजार काफी बड़ा है, विशेषकर खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में इसकी भारी मांग है। गुवाहाटी हवाई अड्डे से निर्यात शुरू होने से असम के उत्पादक सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जुड़ सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और अगरवुड की वैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, कुछ उत्पादकों ने सरकार से स्पष्ट दिशानिर्देश और सहायता की मांग की है, ताकि छोटे किसान भी इस अवसर का लाभ उठा सकें। उनका कहना है कि निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए सहायता प्रदान की जाए। केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। असम के अगरवुड उद्योग के लिए यह निर्णय एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।