गुवाहाटी के बोंडा क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत की पहली निजी मेडिकल साइक्लोट्रॉन सुविधा स्थापित करने की योजना 3 नवंबर को आधिकारिक रूप से सामने आई। यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 62 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य कैंसर जांच के लिए आवश्यक रेडियोआइसोटोप का उत्पादन करना है। इस सुविधा के सितंबर 2027 तक पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में कैंसर देखभाल के बुनियादी ढांचे में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
मेडिकल साइक्लोट्रॉन एक अत्याधुनिक तकनीक है जो कैंसर के निदान और उपचार में उपयोग होने वाले रेडियोफार्मास्यूटिकल्स, विशेष रूप से फ्लोरोडीऑक्सीग्लुकोज (FDG) और अन्य आइसोटोप का उत्पादन करती है। वर्तमान में पूर्वोत्तर के अस्पतालों को इन आइसोटोप के लिए देश के अन्य हिस्सों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं। बोंडा में स्थापित होने वाली यह सुविधा न केवल आत्मनिर्भरता बढ़ाएगी, बल्कि कैंसर मरीजों के लिए जांच प्रक्रिया को तेज, सस्ता और सुलभ बनाएगी।
परियोजना के पीछे निजी निवेशकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सहयोग है, जो क्षेत्र में कैंसर की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इस पहल को आवश्यक बताते हैं। सूत्रों के अनुसार, सुविधा में एक साइक्लोट्रॉन यूनिट, रेडियोकेमिस्ट्री लैब और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली शामिल होगी, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी। इससे न केवल गुवाहाटी, बल्कि असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा के मरीजों को लाभ मिलेगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल साइक्लोट्रॉन सुविधा के शुरू होने से पूर्वोत्तर में कैंसर के शुरुआती निदान में उल्लेखनीय सुधार होगा। पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET) स्कैन के लिए आवश्यक आइसोटोप की उपलब्धता सुनिश्चित होने पर, ट्यूमर का पता लगाना और उपचार की निगरानी अधिक सटीक हो सकेगी। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी और जीवन प्रत्याशा में सुधार होगा।
हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें विनियामक अनुमतियां, तकनीकी विशेषज्ञता की उपलब्धता और रेडियोधर्मी पदार्थों के सुरक्षित परिवहन के मानक शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में समन्वय स्थापित करना होगा ताकि सितंबर 2027 का लक्ष्य समय पर हासिल हो सके। इस पहल से पूर्वोत्तर भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।